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Showing posts from November, 2021

जयपुर

 जयपुर जयपुर राजस्थान की राजधानी है तथा इसको गुलाबी नगरी भी कहते हैं सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा इसकी स्थापना की गई थी यह वास्तुकार विद्याधर थे प्रमुख स्थल आमेर दुर्ग जयपुर से 10 किलोमीटर दूर दिल्ली मार्ग पर स्थित हैं यह अंबावती एवं अंबिका नगर के नाम से भी जाना जाता है जंतर मंतर जयपुर में जंतर मंतर का निर्माण 1734 ईस्वी में किया था सवाई जयसिंह द्वारा इसमें एक वैद्य साला है जो प्रसिद्ध है जयपुर की जो यह वेदसाला है सबसे विशाल हैं हवा महल इसका निर्माण सवाई प्रतापसिंह ने 1799 में करवाया था रामनिवास बाग इसका निर्माण महाराजा सवाई राम सिंह द्वारा किया गया था नाहरगढ़ का किला 1734 में सवाई जयसिंह द्वारा इसका निर्माण किया गया था सांभर झील खारे पानी की सबसे बड़ी झील है तथा यहां नमक का उत्पादन होता है जय बाण जयगढ़ दुर्ग में स्थित एशिया की सबसे बड़ी तोप सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित हैं जयपुर अपनी भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।  यह शहर तीन ओर से पहाड़ी  से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी ...

राजसमंद

 राजसमंद राजसमंद की स्थापना महाराणा राज सिंह द्वारा की गई थी राजसमंद 10 अप्रैल 1993 को राजसमंद को नया जिला बना बना दिया गया था इस जिले की प्रमुख नदियां हैं खारी बनास चंद्रभागा और गोमती प्रमुख स्थल हल्दीघाटी नाथद्वारा से 11 किलोमीटर दूर हल्दी घाटी स्थित है जहां पर 1976 में शौर्य और पराक्रम के प्रतीक महाराणा प्रताप के मानसिंह के बीच में मुगल सम्राट अकबर की सेना का ऐतिहासिक युद्ध हुआ था तथा महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की समाधि यहीं पर ही है कुंभलगढ़ महाराणा कुंभा द्वारा बनाया गया 1458 ईस्वी में इसका निर्माण होता है तथा महाराणा प्रताप ने अपना जीवन यहीं पर ही बिताया था राजसमंद झील महाराणा राज सिंह द्वारा इस दिल का निर्माण करवाया गया था इस झील पर प्रसिद्ध पाल नोटों की है कुंभलगढ़ अभ्यारण पाली में राजसमंद दोनों में फैलाई अभ्यारण 1971 में वन्य अभ्यारण घोषित किया गया था साहिबाग इसी बाग में झाला मन्ना महाराणा प्रताप का ताज पहनकर मुगल सेना से लड़ते हुए शहीद हुए थे चेतक स्मारक राजसमंद महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक बहुत बड़े नाले को पार करते हुए अंतिम सांस ली थी तथा उनका यहीं पर स्मारक बना हुआ ...

चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ को राजस्थान का गौरव कहा जाता है तथा इसका निर्माण चित्रांग मौर्य ने करवाया था दर्शनीय स्थल चित्तौड़गढ़ दुर्ग चित्तौड़गढ़ दुर्ग व्हेल मछली के सम्मान में है सिंगार चवरी यहां महाराणा कुंभा की राजकुमारी के विवाह की चावरी है मीरा मंदिर मुरली बजाते हुए श्री कृष्ण तथा भक्ति में गीत गाते हुए मेरा का चित्र लगा हुआ है तथा इसके पास में ही गुरु रैदास जी की छतरी बनी हुई है रानी पद्मिनी महल रानी पद्मिनी का महल तालाब के बीचो बीच बना हुआ है तथा एक बड़ा एक बहुत बड़ा काच लगा है जिस पर पानी के बीच में है तथा बाहर खड़ा व्यक्ति प्रतिमा देख सकते हैं विजय स्तंभ भारतीय स्थापत्य कला की बारीक भी सुंदर आकर्षण का महत्वपूर्ण बिंदु है तथा इसमें कुल 157 सीटें हैं तथा इसका निर्माण महाराणा कुंभा द्वारा किया गया

उदयपुर

उदयपुर उदयपुर झीलों की नगरी 2000 राजस्थान का कश्मीर में कहते हैं उदयपुर की स्थापना 1559 में महाराणा उदयसिंह ने करवाई थी उदयपुर जिले में जावर की खान है सीसा जस्ता का उत्पादन होता है उदयपुर का हरा संगमरमर प्रसिद्ध है अरावली पर्वतमाला सबसे ज्यादा उदयपुर में ही हैं राजस्थान में भैंस प्रजनन में अनुसंधान केंद्र वल्लभनगर उदयपुर में स्थित है सबसे ज्यादा भील उदयपुर में ही पाए जाते हैं प्रमुख स्थल जगदीश मंदिर जगदीश मंदिर का निर्माण सन 16 से 52 ईसवी में महाराणा जगतसिंह द्वारा करवाया गया था इस मंदिर में भगवान जगदीश की भव्य मूर्तियां है तथा काले पत्थर से निर्मित हैं पिछोला झील एक बंजारा ने महाराणा लाखा के समय इस को बनाया गया था लेक पैलेस जग निवास संग 1746 में महाराणा जगतसिंह द्वितीय द्वारा इसका निर्माण किया गया था फतेहसागर फतेह सागर का निर्माण महाराणा जय सिंह ने 1678 में किया गया था महाराणा प्रताप स्मारक मोती मगरी को महाराणा प्रताप स्मारक के रूप में विकसित किया गया था यह फतेह सागर के किनारे पर स्थित है सहेलियों की बाड़ी माननीय संग्राम सिंह द्वितीय ने इसका निर्माण कराया गया था या राजकुमारियां अपनी स...

नागौर

 नागौर नागौर का क्षेत्रफल 17718 वर्ग किलोमीटर में फैला है विश्व प्रसिद्ध सफेद संगमरमर मकराना नागौर में ही ह टंगस्टन की खान डेगाना नागौर जिले में स्थित है सर्वप्रथम जवाहरलाल नेहरू द्वारा नागौर में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज का उद्घाटन यही सही किया गया था तेजाजी पशु मेला नागौर में ही भरता है नागौर का पूरा नाम छतरपुर था लोक देवता तेजाजी का गांव खरनाल नागौर में ही है तथा उनका जन्म हुआ प्रमुख स्थल नागौर दुर्ग सामंत कैमास ने 1211 में नागौर दूर का निर्माण किया था किले के प्राचीर पर गणेश मंदिर में जहां पर अक्षय तृतीया को मेला भरता है यह किला वीर राव अमर सिंह राठौर की वीर गाथाओं के कारण इतिहास में रहा है राव अमर सिंह राठौड़ की छतरी नागौर नागौर में झंडा तालाब में स्थित 16 कलात्मक छतरियां बनी है तथा यहां अमर सिंह राठौड़ की छतरी बनी प्रसिद्ध जो कलात्मक हैं मेड़ता सिटी नागौर भक्त शिरोमणि मीराबाई का भव्य मंदिर है 27 मंदिर का नाम चारभुजा नाथ मंदिर है इसका निर्माण मीराबाई के पिता राव दूदा ने करवाया था

जोधपुर

 जोधपुर सूर्य नगरी के नाम से सूरत से जोधपुर कला व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध राजस्थान में सर्वाधिक इमारती पत्रों का उत्पादन जोधपुर में होता है प्रमुख स्थल मेहरानगढ़ का किला जोधपुर जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग किस देश के लिए प्रसिद्ध है रोहित स्थापत्य कला का गौरव में सॉरी वे लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है सौंदर्य शक्ति और पुरातन की याद में खड़े इस किले की फूल महल मोती महल श्रृंगार चौकी आदि प्रसिद्ध है जसवंत थड़ा जोधपुर के मेहरानगढ़ दूर के पास में जसवंत सराय स्थित है गीत में संगमरमर का स्फटिक भवन बना हुआ है मंडोर मंडोर का पुराना नाम मांडव पुर था मारवाड़ नरेसो की पूर्व में राजधानी हुआ करती थी उम्मेद भवन जोधपुर में उम्मेद भवन का स्थान शीर्ष पर हैं यह प्रसाद पहाड़ी पर स्थित है तथा यहां पर छीतर पत्थर से बनने के छीतर पैलेस नाम चित्र पैलेस भी रखा गया है सूर्य नगरी के नाम से सूरत से जोधपुर कला व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध राजस्थान में सर्वाधिक इमारती पत्रों का उत्पादन जोधपुर में होता है प्रमुख स्थल मेहरानगढ़ का किला जोधपुर जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग किस देश के लिए प्रसिद्ध है रोहित स्थापत्य कला क...

करौली

  करौली करौली की स्थापना राजा अर्जुन सिंह ने की थी तथा इसको बाद में कल्याणपुरी के नाम से जाना गया तथा बाद में इसको में करौली के नाम से जानते हैं मिट्टी से बना सबसे बड़ा बांध पांचना बांध किस जिले में स्थित है प्रमुख स्थल मदन मोहन जी का मंदिर इस मंदिर में कुल 250 मंदिर इन मंदिरों में मदन मोहन जी का मंदिर प्रमुख है इस मंदिर में सुंदर बनाने तथा अच्छी पेंटिंग से बना हुआ है श्री महावीर जी का मंदिर दिगंबर जैन संप्रदाय का प्रमुख स्थान है तथा यहां पर भगवान महावीर की 400 वर्ष पुरानी मूर्ति मिलती हैं क्या पढ़ते उर्स मेला लगता है तथा मेले में रजत रथ यात्रा का आयोजन भी किया जाता है केला देवी का मंदिर करौली यह मंदिर करौली से 26 किलोमीटर दूर स्थित है यहां पर कैला देवी का बहुत बड़ा मेला लगता है तथा यहां पर लांगुरिया गीत विशेष रूप से यही गया जाते हैं शिवरात्रि पशु मेला शिवरात्रि के शुभ अवसर पर करौली में पशु मेला का आयोजन होता यहां पर ऊंट बेल गाय घोड़े गधे सभी प्रकार के पशु खरीदे और बेचे जाते हैं केला देवी अभ्यारण करौली

बाड़मेर

  बाड़मेर बाड़मेर की स्थापना बाहाड़ राव प्राचीन बाड़मेर को बसाया था बाड़मेर जिले की गुडामालानी तहसील में प्राकृतिक गैस के भंडार मिले प्रमुख स्थल किराडू का मंदिर बाड़मेर से 33 किलोमीटर दूर बाड़मेर मुनाबाव स्टेशन के पास में ही किराडू का ऐतिहासिक मंदिर है इसे मंदिर के सामने पहाड़ी पर महिषासुरमर्दिनि की एक त्रिपाद मूर्ति है नाकोड़ा बाड़मेर श्वेतांबर जैन संप्रदाय का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नाकोड़ा बाड़मेर में स्थित है बाड़मेर का जैन मंदिर श्री पार्श्वनाथ का जैन मंदिर बाड़मेर में ही स्थित है जहां पर शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण देखने को मिलते हैं मल्लिनाथ का मंदिर बालोतरा से 10 किलोमीटर दूर लूणी नदी के पास में मल्लिनाथ जी का मंदिर है जो कि दर्शनीय हैं यहां पर तिलवाड़ा का पशु मेला भरता है नागणेची माता का मंदिर नागणेची माता का मंदिर बाड़मेर के समीप ग्राम नागाणा में नागणेची माता का मंदिर बना हुआ है लकड़ी की प्राचीन मूर्तियों का विशेष रूप से इस मंदिर में देखने को मिलता है संत रामदास जी की छतरी बाड़मेर से 55 किलोमीटर दूर अकेली गांव में संत दास जी की छतरी है

जैसलमेर

  जैसलमेर स्वर्ण नगरी के नाम से जैसलमेर को जानते  हैं जैसलमेर जिले की स्थापना महारावल जैसल ने करवाई थी जैसलमेर के पोकरण में 1974 में भारत में पहला परमाणु विस्फोट का परीक्षण किया था दर्शनीय स्थल सोनार का किला जैसलमेर का किला त्रिभुजाकार पहाड़ी पर स्थित है इसके चारों ओर परकोटे पर 99 झरोखे बने है लक्ष्मीनाथ जी का मंदिर जहां सोने चांदी के कपाटो के कारण प्रसिद्ध है नथमल की हवेली कोमल कशीदाकारी कारण नक्काशी की कलात्मक उत्कृष्ट  का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है सलीम सिंह की हवेली को यहां मोती महल कहा जाता है बादल विलास बादल विलास में ताजिया टावर 5 मंजिला है जो शिल्प कला का बेजोड़ नमूना भी है इसका निर्माण महारावल जवाहर सिंह ने करवाया था प्रसिद्ध बाबा रामदेव का मेला जैसलमेर से 125 किलोमीटर दूर स्थित बाबा रामदेव जी का स्थान है जहां पर प्रसिद्ध मेला लगता है यह मेला भाद्रपद महीने शुक्ल पक्ष की दूज से एकादशी तक लगता है बाबा रामदेव जी को लोग रामसापीर के नाम से भी जानते हैं

बीकानेर

  बीकानेर बीकानेर  की स्थापना राव बीकाजी ने 3 अप्रैल 1488 को की थी बीकानेर जिले में कोई भी नदी नहीं है बीकानेर की बीकानेरी नमकीन भुजिया प्रसिद्ध है एशिया की सबसे बड़ी उनके मंडी यही है बीकानेर से कोच्चि किलोमीटर दूर करनी माता का प्रसिद्ध मंदिर देशनोक में स्थित है जो चूहों के लिए प्रसिद्ध है यहां पर उनको काबा कहा जाता है चारनो की कुल  देवी करणी माता है दर्शनीय स्थल देवी कुंड सागर बीकानेर से मात्र 7 किलोमीटर दूर देवी  कुंड    सागर तालाब है जहां पर बीकानेर राज घराने की छतरियां मिलती है कपिल मुनि का मेला बीकानेर कार्तिक मास की पूर्णिमा को कोलायत बीकानेर में कपिल मुनि का मेला भरता है बीकानेर में जूनागढ़ में लालगढ़ किला स्थित है जो कि देखने के लायक है पलाना यहां पर लिग्नाइट कोयले की मात्रा के भंडार हैं लिंग नाइट ताप विद्युत परियोजना यहीं पर है प्रमुख मंदिर लक्ष्मी नाथ का मंदिर रतन बिहारी का मंदिर धोनी नाथ मंदिर नागणेची मंदिर

चूरू

  चूरू चूरू की स्थापना चूड़ा नामक जाट ने 1620 इसी में करवाई थी चुरू जिले की खास बात यह है कि यहां पर एक भी नदी नहीं है दर्शनीय स्थल कृष्ण मार्ग अभ्यारण इसको ताल छापर अभ्यारण भी कहा जाता है जो चूरू से 90 किलोमीटर दूर स्थित है यह सिया का विश्व प्रसिद्ध काले हिरण यहीं पर ही पाए जाते हैं तिरुपति बालाजी का मंदिर सुजानगढ़ चूरू इस मंदिर का निर्माण सोहन लाल जी जानोदिया ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था इस मंदिर में भित्ति चित्रों के माध्यम से भगवान विष्णु के 10 अवतार को दर्शाया गया है विश्व प्रसिद्ध सालासर हनुमान जी का मंदिर चूरू जिले के सालासर में स्थित हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है जो यहीं पर है यह करीब 2 से ढाई सौ साल पुराना माना जाता है जो सालासर गांव में हनुमान जी की मूर्ति स्थित है यहां पर जहां पर हनुमान जी का मेला लगता है ताल छापर अभ्यारण चुरु चूरु जिले से 90 किलोमीटर दूरी काले हिरणों के लिए यह अभ्यारण प्रसिद्ध है

धौलपुर

 धौलपुर धौलपुर शहर की स्थापना तोमर वंश के राजा राजपूत राजा धवल देव  ने करवाई थी राजस्थान का धौलपुर 27 वा जिला 15 अगस्त 1982 को बनाया गया था धौलपुर से चंबल नदी के पास बसा हुआ है बोलपुर के लाल पत्थर विश्व प्रसिद्ध है जिसको रेड डायमंड भी कहा जाता है दर्शनीय स्थल मचकुंड मचकुंड को तीर्थों का भांजा भी कहा जाता है धौलपुर से करीब ढाई किलोमीटर दूर स्थित मचकुंड है यहां पर लोग स्नान करते हैं और यहां पर जो विशाल मेला लगता है भादो सुदी छठ को   लगता है कमल के फूलों का बाग मचकुंड स्थल के पास ही कमल के फूलों का भाग है जो प्रसिद्ध है यहां मुगल बादशाह बाबर की आत्मकथा तुजुक ए बाबरी यानी कि बाबरनामा जिसमें कमल के फूलों का वर्णन किया गया है जो यहीं का है  शेरगढ़ का किला शेरगढ़ किले का निर्माण मालवा के जो राजा मालदेव थे उन्होंने करवाया था लाल पत्थर धौलपुर के लाल पत्थर जो विश्व प्रसिद्ध है जो यहीं का है

भरतपुर

 भरतपुर भरतपुर को राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार के नाम से जाना जाता है भरतपुर में जाट चार्ट रियासत के लोग निवास करते थे यहां पर विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है जो पक्षियों का स्वर्ग भी है भरतपुर का बम नृत्य फेमस है इसको बमरसिया गीत पर गाया जाता है राजस्थान में सांसी जनजाति के लोग सबसे ज्यादा यहां पर ही मिलते हैं विश्व का सुप्रसिद्ध खानवा का युद्ध बाबर और राणा सांगा के बीच में 1527 ईस्वी को लड़ा गया था यहीं पर हुआ था दर्शनीय स्थल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान यहीं पर स्थित है जो 29 किलोमीटर दूर तक फैला है लोहागढ़ दुर्ग माना जाता है कि लोहागढ़ दुर्ग को अभी तक कोई जीत नहीं पाया इसको बनाने तक से लेकर के अभी तक यहां पर कई बार आक्रमण वहां पर कोई जीत नहीं पाया इस दुर्ग का निर्माण महाराजा जवाहर सिंह ने दिल्ली विजय के उपलक्ष में बनाया गया था डीग के जल महल इसका निर्माण महाराजा सूरजमल द्वारा करवाया गया था जो भरतपुर शासकों की प्राचीन राजधानी हुआ करती थी यहां का जो प्रसिद्ध जल मेल है वह बहुत ही प्रसिद्ध है बयाना का किला भरतपुर जिले के बयाना दुर्ग का एक बहुत ह...

अलवर

अलवर अलवर को राजस्थान का सिंह द्वार के नाम से भी जाना जाता है मुगल काल के पतन के समय यहांके  जो महाराजा  राजा प्रताप सिंह ने इसकी स्थापना करवाई थी अलवर में मेव जाति के लोग ज्यादा रहते हैं अलवर के कुछ दर्शनीय स्थल है  सिलीसेढ़ अलवर से मात्र 16 किलोमीटर दूरी पर स्थित अरावली प्रदूषण बदलाव से गिरी यहां के स्वर में स्थल पर्यटकों को बहुत या आकर्षित करती है स्टील के पास ही पर्यटक विकास निगम के लेक पैलेस होटल में रुकने की व्यवस्था भी हैं ताल वृक्ष अलवर जिले से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित ताल वृक्ष जिले का यह एक रमणीय स्थल है जो प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ पर मित्र केंद्र के बना हुआ है यहां पर मांग ऋषि मांडवय ने अपनी तपोभूमि बनाया था भरतरी उज्जैन के राजा भरतरी ने अपनी अंतिम दिन दिनों में यही ठहरे थे या अलवर से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित है जहां भरथरी के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर भरतरी का मेला भी लगता है पांडुपोल यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों को को रोके सेना ने यहीं पर गिरा था तो महाबली भ...

अजमेर

 अजमेर अजमेर जिले को 1 नंबर 1956 को राजस्थान में मिला लिया गया था अजमेर का इसी के साथ एकीकरण हो गया था अजमेर में 5 किलोमीटर दूर नाग पहाड़ी भी स्थित है अजमेर के कुछ महत्वपूर्ण स्थल निम्न है अड़ाई दिन का झोपड़ा दरगाह के पास में यह का ढाई दिन का झोपड़ा भी स्थित है जिन्होंने मोहम्मद गोरी के निर्देश के अनुसार कुतुबुद्दीन ऐबक में इस को तुडवा कर यहां पर ढाई दिन का झोपड़ा बनाया था जिसको ढाई दिन में बनाया गया था अजमेर दुर्ग या तारागढ़ राजा अजय राज चौहान द्वारा 2855 फीट की ऊंचाई पर निर्मित ऐतिहासिक दुर्ग स्थित है इसमें छोटे-बड़े कुल 9 दरवाजे हैं यहां पर मीर साहब की दरगाह भी प्रसिद्ध है फ़ाय सागर अकाल पड़ने के दौरान इस झील का निर्माण करवाया गया था जहां पर पानी एकत्रित करने के लिए इस झील का निर्माण करवाया गया था इसमें बांडी नदी का जल एकत्रित होता है इसकी जो गहराई है जो 26 हैं जिससे अजमेर को पेयजल उपलब्ध होता है बजरंगगढ़  अजमेर में बजरंगगढ़ नामक स्थान पर हनुमान जी का मंदिर है जो हिंदुओं को पवित्र श्रद्धा का स्थल बना हुआ है पुष्कर में ब्रह्मा जी का मंदिर अजमेर से मात्र 11 किलोमीटर दूरी पर स्थ...