जयपुर

 जयपुर

जयपुर राजस्थान की राजधानी है तथा इसको गुलाबी नगरी भी कहते हैं

सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा इसकी स्थापना की गई थी यह वास्तुकार विद्याधर थे


प्रमुख स्थल

आमेर दुर्ग

जयपुर से 10 किलोमीटर दूर दिल्ली मार्ग पर स्थित हैं यह अंबावती एवं अंबिका नगर के नाम से भी जाना जाता है

जंतर मंतर

जयपुर में जंतर मंतर का निर्माण 1734 ईस्वी में किया था सवाई जयसिंह द्वारा इसमें एक वैद्य साला है जो प्रसिद्ध है जयपुर की जो यह वेदसाला है सबसे विशाल हैं


हवा महल

इसका निर्माण सवाई प्रतापसिंह ने 1799 में करवाया था

रामनिवास बाग

इसका निर्माण महाराजा सवाई राम सिंह द्वारा किया गया था

नाहरगढ़ का किला

1734 में सवाई जयसिंह द्वारा इसका निर्माण किया गया था

सांभर झील

खारे पानी की सबसे बड़ी झील है तथा यहां नमक का उत्पादन होता है

जय बाण

जयगढ़ दुर्ग में स्थित एशिया की सबसे बड़ी तोप सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित हैं

जयपुर अपनी भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

 यह शहर तीन ओर से पहाड़ी  से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों की जाति है जो यहाँ के स्थापत्य की खूबी है।  सवाई रामसिंह ने इंग्लॅण्ड  की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से सजाया  था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है। राजा जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा। जयपुर भारत के टूरिस्ट सर्किट गोल्डन ट्रायंगल का हिस्सा भी है। इस गोल्डन ट्रायंगल में दिल्ली, आगरा और जयपुर आते हैं भारत के मानचित्र में उनकी स्थिति अर्थात लोकेशन को देखने पर यह एक त्रिभुज  का आकार हैं। इस कारण इन्हें भारत का स्वर्णिम त्रिभुज इंडियन गोल्डन ट्रायंगल भी  कहते हैं। राजधानी दिल्ली से जयपुर की दूरी मात्र   280 किलोमीटर है।

जयपुर  शहर चारों ओर से दीवारों और परकोटों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रवेश के लिए सात दरवाजे बने हुए  हैं। बाद में एक और द्वार भी बना जो 'न्यू गेट' कहलाता है  पूरा शहर करीब छह भागों में बँटा हुआ है और यह 111 फुट चौड़ी सड़कों से विभाजित है। पाँच भाग मध्य प्रासाद भाग को पूर्वी, दक्षिणी एवं पश्चिमी ओर से घेरे हुए हैं और छठा भाग एकदम पूर्व में स्थित है। प्रासाद भाग में हवा महल  परिसर, व्यवस्थित उद्यान एवं एक छोटी झील हैं। पुराने शहर के उत्तर-पश्चिमी ओर पहाड़ी पर नाहर गड दुर्ग शहर के मुकुट के समान दिखता है। इसके अलावा यहां मध्य भाग में ही सवाई जयसिंह द्वारा बनावायी गईं वैधशाला, जंतर मंतर, जयपुर भी यही पर  हैं।

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