अलवर
अलवर
अलवर को राजस्थान का सिंह द्वार के नाम से भी जाना जाता है मुगल काल के पतन के समय यहांके जो महाराजा राजा प्रताप सिंह ने इसकी स्थापना करवाई थी अलवर में मेव जाति के लोग ज्यादा रहते हैं
अलवर के कुछ दर्शनीय स्थल है
सिलीसेढ़
अलवर से मात्र 16 किलोमीटर दूरी पर स्थित अरावली प्रदूषण बदलाव से गिरी यहां के स्वर में स्थल पर्यटकों को बहुत या आकर्षित करती है स्टील के पास ही पर्यटक विकास निगम के लेक पैलेस होटल में रुकने की व्यवस्था भी हैं
ताल वृक्ष
अलवर जिले से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित ताल वृक्ष जिले का यह एक रमणीय स्थल है जो प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ पर मित्र केंद्र के बना हुआ है यहां पर मांग ऋषि मांडवय ने अपनी तपोभूमि बनाया था
भरतरी
उज्जैन के राजा भरतरी ने अपनी अंतिम दिन दिनों में यही ठहरे थे या अलवर से 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित है जहां भरथरी के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर भरतरी का मेला भी लगता है
पांडुपोल
यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है
माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों को को रोके सेना ने यहीं पर गिरा था तो महाबली भीम ने गद्दा मारकर यहां पर रास्ता निकाला गया था तब से ही इस स्थान को पांडुपोल के नाम से जाना जाता है
सरिस्का अभ्यारण
अलवर से करीब 35 दूर स्थित है यहां पर वन्य जीव विचरण करने आते हैं
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