अजमेर

 अजमेर

अजमेर जिले को 1 नंबर 1956 को राजस्थान में मिला लिया गया था अजमेर का इसी के साथ एकीकरण हो गया था अजमेर में 5 किलोमीटर दूर नाग पहाड़ी भी स्थित है

अजमेर के कुछ महत्वपूर्ण स्थल निम्न है

अड़ाई दिन का झोपड़ा

दरगाह के पास में यह का ढाई दिन का झोपड़ा भी स्थित है जिन्होंने मोहम्मद गोरी के निर्देश के अनुसार कुतुबुद्दीन ऐबक में इस को तुडवा कर यहां पर ढाई दिन का झोपड़ा बनाया था जिसको ढाई दिन में बनाया गया था

अजमेर दुर्ग या तारागढ़

राजा अजय राज चौहान द्वारा 2855 फीट की ऊंचाई पर निर्मित ऐतिहासिक दुर्ग स्थित है इसमें छोटे-बड़े कुल 9 दरवाजे हैं यहां पर मीर साहब की दरगाह भी प्रसिद्ध है

फ़ाय सागर

अकाल पड़ने के दौरान इस झील का निर्माण करवाया गया था जहां पर पानी एकत्रित करने के लिए इस झील का निर्माण करवाया गया था इसमें बांडी नदी का जल एकत्रित होता है इसकी जो गहराई है जो 26 हैं जिससे अजमेर को पेयजल उपलब्ध होता है


बजरंगगढ़

 अजमेर में बजरंगगढ़ नामक स्थान पर हनुमान जी का मंदिर है जो हिंदुओं को पवित्र श्रद्धा का स्थल बना हुआ है


पुष्कर में ब्रह्मा जी का मंदिर

अजमेर से मात्र 11 किलोमीटर दूरी पर स्थित है जहां पर रमणी घाटी जिसको पुष्कर घाटी के नाम से जाना जाता है वहां पर एक ब्रह्मा जी व सावित्री जी का एकमात्र प्राचीन मंदिर है जो यहीं पर स्थित है कार्तिक मास की पूर्णिमा को यहाँ पर एक विश्व प्रसिद्ध मेला लगता है

इतिहास

700 वर्षों तक चौहान वंश के राजपूतो का राज था।

अजमेर में 1153 ई में प्रथम नरेश बीसलदेव चौहान थे  ने एक मन्दिर बनवाया था, जिसे 1192 ई. में मुहम्मद ग़ोरी ने तुडवा करके उसके स्थान पर अढ़ाई दिन का झोंपड़ा नामक मस्जिद बनवाई थी। विद्वानों का मत है, कि इसका निर्माता कुतुबुद्दीन ऐबक था। कहते है, कि यह इमारत अढ़ाई दिन में बनकर तैयार हुई थी, किन्तु ऐतिहासिकों का मत है, कि इस नाम के पड़ने का कारण इस स्थान पर मराठा काल में होने वाला अढ़ाई दिन का मेला है। इस इमारत की क़ारीगरी विशेषकर पत्थर की नक़्क़ाशी  है। इससे पहले सोमनाथ जाते समय (1124 ई.) में महमूद ग़ज़नवी अजमेर होकर गया था। मुहम्मद ग़ौरी ने जब 1192 ई. में भारत पर आक्रमण किया, तो उस समय अजमेर पृथ्वीराज के राज्य का एक बड़ा सेहर  था। पृथ्वीराज की पराजय के पश्चात दिल्ली पर मुसलमानों का अधिकार होने के साथ अजमेर पर भी उनका क़ब्ज़ा हो गया और फिर दिल्ली के भाग्य के साथ-साथ अजमेर के भाग्य का भी निपटारा होता रहा। 1193 में दिल्ली के ग़ुलाम वंश ने इसे अपने अधिकार में ले लिया। मुग़ल सम्राट अकबर को अजमेर से बहुत पसंद था, क्योंकि उसे मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की यात्रा में बड़ी श्रृद्धा थी। एक बार वह आगरा से पैदल ही चलकर दरग़ाह की ज़ियारत को आया था। मुईनुद्दीन चिश्ती 12वीं शती ई. में ईरान से भारत आए। अकबर और जहाँगीर ने इस दरग़ाह के पास ही मस्जिदें बनवाई थीं। शाहजहाँ ने अजमेर को अपने अस्थायी निवास-स्थान के लिए चुना गया  था। निकटवर्ती तारागढ़ की पहाड़ी पर भी उसने एक दुर्ग-प्रासाद का निर्माण करवाया था, जिसे विशप हेबर ने भारत का जिब्राल्टर कहा है। यह निश्चित है, मुगलकाल में अजमेर को अपनी महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण राजस्थान का नाक़ा मन  जाने लगा जाता था। अजमेर के पास ही अनासागर झील है, जिसकी सुन्दर पर्वतीय सर्सेख्ला  आकृष्ट होकर शाहजहाँ ने यहाँ पर संगमरमर के महल बनवाए थे। यह झील अजमेर-पुष्कर मार्ग पर है। सन् 1878 में अन्ग्रेजों ने बदनोरा राज्य में अजमेर और केकड़ी प्रान्त को सामिल कर अजमेर मेरवाड़ा के नाम से संयुक्त स्टेट बनाकर केन्द्रीय शासक प्रदेश बनाया था। 1956 में यह राजस्थान राज्य का हिस्सा बन गया।

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